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How to win friends and influence people (Page 1)
संशोधित संस्करण की प्रस्तावनाहाऊ टू विन फ्रैंड्स एंड इंफ्लूएंस पीपुल का पहला संस्करण 1937 में छपा। इसकी केवल पांच हजार प्रतियां छापी गईं। न तो डेल कारनेगी को, न ही प्रकाशकों साइमन एंड शुस्टर को उम्मीद थी कि इस पुस्तक की इससे ज्यादाद प्रतियां बिकेंगी। उन्हें बहुत हैरानी हुई जब यह पुस्तक रातों रात लोकप्रिय हो गई और जनता ने इसकी इतनी मांग की कि इसके एक के बाद एक संस्करण छापने पड़े। हाऊ टू विन फ्रैंड्स एंड इंफ्लूएंस पीपुल पुस्तकों के इतिहास में सर्वकालिक अंतर्राष्ट्रीय बेस्टसेलर बन चुकी है। हम यह नहीं कह सकते कि इसकी लोकप्रियता का कारण यह था कि उस समय मंदी का दौर खत्म ही हुआ था। दरअसल इसने जनमानस की ऐसी नस को छुआ है, ऐसी इंसानी जरूरत को पूरा किया है कि यह आधी सदी बाद भी लगातार बिक रही है।
डेल कारनेगी कहा करते थे कि दस लाख डॉलर कमाना आसान है, परंतु अंग्रेजी भाषा में एक वाक्यांश लोकप्रिय करना मुश्किल है। हाऊ टू विन फ्रैंड्स एंड इंफ्लूएंस पीपुल एक ऐसा ही वाक्यांश है जिसे लोगों ने उद्धृत किया है, पैराफेज किया है, पैरोडी किया है और राजनीतिक कार्टूनों से लेकर उपन्यासों तक अनंत संदर्भों में प्रयुक्त किया है। इस पुस्तक का अनुवाद लगभग सारी लिखी जाने वाली भाषाओं में हो चुका है। हर पीढ़ी ने इसे नए सिरे से खोजा है और इसकी प्रासंगिक्ता और इसके मूल्य को पहचाना है। Page 2

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