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    अब हम तार्किक प्रशन पर आते हैं: ऐसी पुस्तक को रिवाइज करने की क्या जरूरत थी जो इतनी लोकप्रिय और शाशवत महत्व की है? सफलता के साथ छेड़छाड़ क्यों?
    इसका जवाब जानने के लिए हमें एक एहसास होना चाहिए कि डेल कारनेगी स्वंय जीवनभर अपनी पुस्तकों को रिवाइज करते रहे। हाऊ टू विन फ्रैंड्स एंड इंफ्लूएंस पीपुल एक पाठ्यपुस्तक के रूप में लिखी गई थी, इफेक्टिव स्पीकिंग एंड ह्यूमन रिलेशन्स के कोर्सेज की पाठ्यपुस्तक के रूप में। यह पुस्तक आज भी इसी रूप में प्रयुक्त हो रही है। 1955 में अपनी मृत्यु तक वे लगातार कोर्स को सुधारते और रिवाइज करते रहे ताकि बदलती हुई दुनिया की बदलती हुई जरूरत का बेहतर ध्यान रखा जा सके। वर्तमान दुनिया के बदलते हुए स्वरूप से डेल कारनेगी से ज्यादा संवेदनशील कोई नहीं था। उन्होंने अपने शिक्षा देने के तरीकों को भी लगातार सुधारा। उन्होंने इफेक्टिव स्पीकिंग की अपनी पुस्तक को भी कई बार अपडेट किया। अगर वे कुछ समय और जीवित रहते तो उन्होंने खुद ही हाऊ टू विन फ्रैंड्स एंड इंफ्लूएंस पीपुल को रिवाइज किया होता ताकि बदलती दुनिया में अधिक प्रासंगिक हो सके।
    पुस्तक में दिए गए कई महत्वपूर्ण लोगों के नाम इसके प्रथम प्रकाशन के समय जाने पहचाने थे, परंतु आज के पाठक उन्हें नहीं पहचान सकते। कुछ उदाहरण और वाक्यांश अब पुराने लगते हैं, उसी तरह जैसे किसी विक्टोरियन उपन्यास का सामाजिक माहौल पुराना लगता है। इस पुस्तक का महत्वपूर्ण संदेश और संपूर्ण प्रभाव उस हद तक कमजोर हो गया था।
    इस रिवीजन में हमारा उद्देश्य इस पुस्तक को आधुनिक पाठक के लिए स्पष्ट और सुदृढ़ करना है, इसके मूल भाव से छेड़छाड़ किये बिना। हमने हाऊ टू विन फ्रैंड्स एंड इंफ्लूएंस पीपुल को बदला नहीं है। हमने इसमें से छुटपुट चीजें हटाई हैं और कुछ समकालीन उदाहरण जोड़े हैं। कारनेगी की जोशीली और उतावली शैली अब भी बरकरार है।यहां तक कि तीस के दशक का स्लैंग भी मौजूद है। डेल कारनेगी ने उसी तरह लिखा जैसे बोलते थे, उत्साही, बातूनी, चर्चा करने वाली शैली में।
    तो उनकी आवाज में, इस पुस्तक में उतना ही दम है जितना पहले था। दुनियाभर में लोग कारनेगी कोर्सेज में प्रशिक्षित हो रहे हैं और इनकी संख्या हर साल बढ़ रही है। और लाखों लोग हाऊ टू विन फ्रैंड्स एंड इंफ्लूएंस पीपुल पढ़कर अपने जीवन को सुधारने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। उन सभी के सामने हम ये रिवाइज्ड पुस्तक प्रस्तुत कर रहे हैं, जिसमें हमारा योगदान बस इतना सा है कि हमने एक सुंदर उपकरण को थोड़ा सा चमका और तराश दिया है।
    डोरथी कारनेगी
    (श्रीमति डेल कारनेगी) Page3...

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