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  • How to win friends and influence people (Page 3)


    यह पुस्तक कैसे और क्यों लिखी गई: डेल कारनेगी
    बीसबीं सदी के शुरूआती पैंतीस सालों में अमेरिका में दो लाख से भी अधिक किताबें छपीं। उनमें से ज्यादातर बेजान और नीरस थीं और बिक्री के लिहाज से भी उनमें कई घाटे का सौदा थीं। मैने क्या कहा, “कई?” एक बड़े प्रकाशन समूह के प्रेसिडेंट ने यह स्वीकार किया कि हालांकि उनकी कंपनी को प्रकाशन का पचहत्तर वर्षों का अनुभव है, फिर भी कंपनी को आठ में से सात किताबों में घाटा उठाना पड़ता है।

    सवाल यह है कि यह जानने के बाद भी मैं यह किताब लिखने की जुर्रत कर रहा हूं। और अगर मैं ऐसा कर रहा हूं, तो आप इसे पढ़ने का कष्ट क्यों करें?

    दोनों ही सवाल बाजिब हैं, और मैं इन दोनों का जवाब देने की कोशिश करूंगा।

    1912 से मैं न्यूयॉर्क में बिजनेस से जुड़े व्यक्तियों और प्रोफेश्नल लोगों के लिए अपना शैक्षणिक पाठ्यक्रम चला रहा हूं। शुरूआत में तो मैं सिर्फ लोगों को सार्वजनिक रूप से बोलने की कला सिखाता था। ऐसे कोर्स जिनका लक्ष्य था वयस्क लोगों के दिल से बोलने का डर दूर करना, उनमें इतना आत्मविश्वास पैदा करना कि वे अपने पैरों पर खड़े होकर ज्यादा स्पष्ट तरीके से अपने विचार व्यक्त कर सकें, चाहे वे बिजनेस इंटरव्यू में बोल रहे हों या समुह में चर्चा कर रहे हों।
    परंतु कुछ समय बाद मुछे यह महसुस हुआ कि न सिर्फ प्रभावी ढंग से बोलने की कला महत्वपूर्ण है बल्किलोगों के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि वे रोजमर्रा के बिजनेस और सामाजिक जी5वन में लोगों के साथ किस तरह से व्यवहार करें।
    मैने यह भी महसूस किया कि मुझे भी ऐसे प्रशिक्षण की सख्त जरूरत थी। जब मैंने पीछे मुड़कर अपने बीते हुए सालों को देखा तो मैं कांप गया कि समझदारी कि कमी और इस कला के अज्ञान की वजह से मैंने जिंदगी में कितनी सारी गल्तियां की थीं। काश किसी ने मेरे हाथों में ऐसी कोई पुस्तक 20 साल पहले रख दी होती, ये मेरे लिए कितना अनमोल तोहफा होता। Page 4...

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